कुमाऊँ मण्डल में माँ देवी के पावन मंदिर स्थल

हाटकालिका मंदिर, गंगोलीहाट

माता भगवती महाकालिका का यह दरबार दिव्य चमत्कारों से भरा पड़ा है. कहा जाता है कि जो भी भक्तजन श्रध्दापूर्वक महाकाली के चरणों में आराधना के पुष्प अर्पित करता है उसके रोग, शोक, दरिद्रता एवं विपदाएं दूर हो जाता है

पूर्णागिरी मंदिर, टनकपुर

प्रसिद्ध सिद्धपीठों में से एक माँ पूर्णागिरी मंदिर टनकपुर से लगभग 21 कि.मी. की दूरी पर स्थित है. चैत्र नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त यहाँ दर्शन के लिए आते है.

वाराही मंदिर, देवीधुर

चम्पावत जिले के देवीधुरा में माँ वाराही देवी के मंदिर के प्रांगण मे हर साल रक्षाबन्धन के अवसर पर श्रावणी पूर्णिमा को ‘बग्वाल ‘ खेती की जाती है.

नैना देवी मंदिर, नैनीताल

नैना देवी मंदिर नैनीताल में नैनी झील के उत्त्तरी किनारे पर स्थित है. यहाँ सती के शक्ति रूप की पूजा की जाती है मंदिर में दो नेत्र है जो नैना देवी को दर्शाते है.

गर्जिया देवी मंदिर, गर्जिया ( नैनीताल )

गर्जिया देवी मंदिर माता पार्वती के प्रमुख मंदिरों में से एक है यह मंदिर भक्तो की श्रद्धा एवं विश्वास के साथ खूबसूरत वातावरण, शांति एवं रमणीयता के लिए जाना जाता है.चहत

कोटगाड़ी (कोकिला) देवी मंदिर, पिथौरागढ़

थल से 9 कि.मी. की दूरी पर स्थित कोटगाड़ी देवी मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है इस मंदिर की मान्यता देवी मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है इस मंदिर की मान्यता ‘अंतिम दिव्य अदालत ‘ के रूप में है जहाँ वंचित भक्त भगवान से अपनी इच्छाओं को पूरा करने की प्राथर्ना करने आते है

कोट भ्रामरी मन्दिर, बागेश्वर

कोट भ्रामरी मंदिर को भ्रामरी देवी मंदिर और कोट माई नाम से भी जाना जाता है. यह बैजनाथ से 3 कि.मी. की दूरी पर डंगोली के समीप स्थित है .

चैती (बाल सुन्दरी) मंदिर, काशीपुर

माता चैती (बाल सुन्दरी) मंदिर काशीपुर में स्थित है, यहाँ चैती मेला के नाम से चैत्र मास में प्रसिद्ध मेला लगता है आदिशक्ति की बाल रूप में पूजा होने के कारण इसे बाल सुन्दरी मंदिर कहा जाता है.

नंदा देवी मंदिर, अल्मोड़ा

कुमाऊँ क्षेत्र के पवित्र स्थलों में से एक नंदा देवी मंदिर का विशेष धार्मिक महत्त्व है. इसका इतिहास 1000 साल से भी ज्यादा से भी पुराना है. कुमाऊँनी शिल्पविद्या शैली से निर्मित यह मंदिर चंद्र वंश की ईष्ट देवी को समर्पित है

कसार देवी मंदिर, अल्मोड़ा

अल्मोड़ा में कसार पर्वत स्थित कसार देवी मंदिर अद्वितीय और चुम्बकीय शक्ति का केंद्र है. कहा जाता है कि इस शक्तिपीट में माँ दुर्गा साक्षात् प्रकट हुई थी.

दूनागिरी मंदिर, द्वाराहाट

माँ दूनागिरी मंदिर द्वाराहाट से करीब 14 कि.मी. की दूरी पर स्थित है. इस भव्य मंदिर में माँ दूनागिरी वैष्णवी रूप में पूजी जाती है.

अखिलतारणी मंदिर, लोहाहाट, चम्पावत

माँ अखिलतारणी मंदिर को उप शक्तिपीठ माना जाता है जो घने हरे देवदार वनों के बीच में स्थित है. मान्यता के अनुसार यह पांडवों ने घटोत्कच का सिर पाने के लिए माँ भगवती की प्रार्थना की थी.