गढ़वाल मण्डल में माँ देवी के पावन मंदिर स्थल

कालिका माता, बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल

कालिका माता, बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल

पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित कालिंका माता मंदिर को माँ काली का स्वरूप माना जाता है. यहाँ हर 3 साल मे सर्दियो के मौसम में प्रसिद्ध मेला लगता है.

कालीमठ मंदिर, रुद्रप्रयाग

रुद्रप्रयाग जिले में स्थित कालीमठ मंदिर को महालक्ष्मी महासरस्वती और महाकाली के सिद्धपीठ के रूप में में जाना जाता है. इस स्थान का वर्णन दुर्गा सप्तशती में भी है.

मनसा देवी मंदिर, हरिद्वार

मनसा देवी को भगवान शिव की मानस पुत्री के रूप में पूजा जाता है. इसका प्रादुर्भाव मस्तक से हुआ है इस कारण इसका नाम मनसा पड़ा. इन्हें नागराज वासुकी की बहन के रूप में भी पूजा जाता है .

चंडी देवी, हरिद्वार

देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल चंडी देवी मंदिर नील पर्वत के शिखर पर स्थित है. यह प्रसिद्ध शाक्तिपीठो में से एक हैं. मान्यता है की कि मंदिर की मूर्ति को महान संत आदि शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में स्थापित किया था

कुन्जापुरी देवी मंदिर, नरेन्द्र नगर

ऋषिकेश से लगभग 25 किमी की दूरी पर स्थित कुन्जापुरी देवी मंदिर महत्त्वपूर्ण देवी सती को समर्पित है. मान्यता है कि यहाँ माता सती के शरीर का उपरी भाग गिरा था.

सुरकंडा देवी मंदिर,कद्दूखाल, टिहरी

सुरकंडा देवी मंदिर टिहरी क्षेत्र में सुरकंडा पर्वत पर लगभग 2757 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ में से एक है.

चन्द्रबदनी मंदिर, देवप्रयाग

देवप्रयाग से 33 कि.मी. और कन्दिखाल से 10 कि.मी. दूर स्थित माँ चन्द्रबदनी मंदिर शाक्तिपीठो और माता सती के पवित्र स्थलों में से एक है. यह शक्तिपीठ च चंद्र्कूट पर्वत के ऊपर स्थित है.

नागनी देवी, उत्तरकाशी

बालखिला पर्वत पर बसे नागणी देवी मंदिर का विशेष धार्मिक महत्त्व है. मान्यता है कि माँ नागणी के दर्शन से मनुष्य को सात जन्मों के पापो से मुक्ति मिलती है. नवरात्र के दिनों में यह श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

ज्वाला देवी मंदिर, सतपुली

नबालिका नदी के किनार स्थित ज्वालपा देवी मंदिर लगभग 350 मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है. नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में विशेष उत्सव का आयोजन होता है

नंदा देवी मंदिर, कुरुड (चमोली)

कुरुड़ में नंदा देवी का मंदिर गाँव के शीर्ष पर देवसरि तोक पर स्थित है. कुरुड नंदा को राजराजेश्वरी के नाम से भी पुकारा जाता है.

हरियाली देवी मंदिर, जसोली,रुद्रप्रयाग

रुद्रप्रयाग का माँ हरियाली देवी मंदिर विशाल हिमालयन श्रेणियो के बीच स्थित है. प्रसिद्ध सिद्धपीठी में से एक इस मंदिर की देवी को सीता माता, बाला देवी और वैष्णो देवी के नाम से भी जाना जाता है.

धारी देवी मंदिर, श्रीनगर

अलकनन्दा नदी के तट पर स्थित माँ धारी देवी मंदिर एक प्राचीन सिद्धपीठ है. माता धारी देवी को देवभूमि उत्तराखंड की रक्षक देवी के रूप में जाना जाता है.